सहस्त्रों युगों से मैं खोज रहा था ,
मेरी उसी खोज का प्रतिफल हो तुम,
अनभिग्य मार्गो में मैं भटक रहा था
मेरे ज्ञान की अभादिप्ती हो तुम
सहस्त्रों विड्ब्नाओ से मैं जूझ रहा था
मेरी मुक्ति का व्कल्पिक हो तुम,
सर्वकालिक आनन्दों से परे मैं जो रहा था ,
मेरे आन्दमय रसों का श्रोत हो तुम,
तम के अभेध्य चक्रों को नष्ट कर रहा था,
मेरी उसी शक्ति का संबल हो तुम
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