Sunday, 7 July 2013

चाहत (05th Feb 1996)

तेरी पीड़ा का कारण होकर भी ,
तेरी पीड़ा हरना चाहूँ 
लहू  पीकर तेरा  मैं   ,
तुझे अभिसिंच्त करना चाहूँ ,

नींद चुराकर तेरी मैं 
सपनो में तेरे बसना चाहूँ,
बाँध शंर्खलाऊ में तुझको ,
सवचंध उड़ान देखना चाहूँ,

तेरी आखों में भरकर आंसॅू ,
मुस्कान तेरी देखना चाहूँ,
बरबादी  का सामान जोड़कर 
आबाद तुखको करना चाहूँ,

अस्तित्वहीन तुझको करके,
तुझे पहेचान देना चाहूँ,
फिर भी इतना जानू 
मैं तुझको ही पाना चाहूँ,

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