तेरी पीड़ा का कारण होकर भी ,
तेरी पीड़ा हरना
चाहूँ
लहू पीकर
तेरा मैं ,
तुझे अभिसिंच्त
करना चाहूँ ,
नींद चुराकर तेरी
मैं
सपनो में तेरे
बसना चाहूँ,
बाँध शंर्खलाऊ
में तुझको ,
सवचंध उड़ान देखना चाहूँ,
तेरी आखों में
भरकर आंसॅू ,
मुस्कान तेरी
देखना चाहूँ,
बरबादी का
सामान जोड़कर
आबाद तुखको करना चाहूँ,
अस्तित्वहीन
तुझको करके,
तुझे पहेचान देना चाहूँ,
फिर भी इतना जानू
मैं तुझको ही
पाना चाहूँ,
Iss chahat ko salam
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