धड़कन की खनक
साँसों की महक
आचँल में छिपाए
गुल रही चहक
पंख पसराए
नभ में छाए
मधुर रंगीले
गीत गुन गुनाए
भोर चढ़े जो
नीड़ छोड़े
भूले भटको की
साँस फिर जोड़े
मिलने की चाहत
बिछोह की कसक
अहसास से परे
गुल रही चहक
23-06-1999
अनजान थी चहक थी
सुख की खनक थी
अब भिखरे तिनके
उखड़े पंख , भटका सूरज
गिरते तारे जलता जग
सुलगती धरती , टूटा आकाश
भिखरा नीड़